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HARIDWAR TIRTH MACHHREHTA हरिद्वार तीर्थ मछरेहटा

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HARIDWAR TIRTH MACHHREHTA       हरिद्वार तीर्थ मछरेहटा          HARIDWAR TIRTH MACHHREHTA  हरिद्वार तीर्थ मछरेहटा फाल्गुन मास की अष्टमी को मिश्रित तीर्थ से प्रारम्भ होने वाले चौरासी कोसीय परिक्रमा में मंडरिक ऋषि के आश्रम मंदरुआ से जलग्राम (जरिगवां ) को जाते हुए परिक्रमा यहीं से निकलता है और यहाँ पर हरिद्वार तीर्थ में स्नान ध्यान करता है,यहां का स्थान बहुत ही सुन्दर और मनोरम है। यहाँ से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर माँ भारासैनी शक्तिपीठ है। मछरेहटा के बारे में कहा जाता है की ये गुरु गोरखनाथ के शिष्य मछन्दरनाथ ने यहीं पर तपस्या की थी उन्हीं के नाम पर इसका नाम मछरेहटा पड़ा। आज के दिन यहाँ पर साधु संतों के लिए जगह जगह भंडारा करवाया जाता है। यही से आगे जरिगवां जाने पर कुछ दूरी पर कुसौली (कुशावर्त)  में तीर्थ और मंदिर है काफी सुरम्य तीर्थ और मंदिर पर भी परिक्रमार्थी विश्राम व स्नान ध्यान करते हुए जरिगवां में रात्रि विश्राम करते हैं।    हम आप सभी  कुसौली तीर्थ व माँ भारासैनी शक्तिपीठ  के चित्र व लोकेश...

भारासैनी माता मंदिर (BHARASAINI MATA MANDIR)

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भारासैनी माता  मंदिर  (BHARASAINI MATA MANDIR)      उत्तरप्रदेश के जिला सीतापुर में मिश्रित तीर्थ क्षेत्र में मिश्रित से सिर्फ 13 किमी की दूरी पर एक दिव्य और मनोरम स्थान है मां भारासैनी माता का मंदिर। यहाँ पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं दूर दूर से लोग अपनी मनोकामना लेकर और माता भारसैनी का आशीर्वाद की कामना लेकर आये हैं माँ का आशीर्वाद पाते हैं।  काफी प्राचीन इस मंदिर में नवरात्रि में मेले का आयोजन होता है ,माता भगवती के विशाल जागरण का आयोजन होता है।  नजदीकी देवस्थान  हरिद्वार तीर्थ मछरेहटा ,  कुशावर्त कुसौली ,  मिश्रित तीर्थ , जरिगवां   मां भारासैनी माता का मंदिर देवज्ञानम वेबसाइट के द्वारा भारतवर्ष की विभिन्न धार्मिक,सांस्कृतिक परम्पराओं को विश्व भर में प्रचारित करने के लिए हमारा ये छोटा सा प्रयास है, भारतीय संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सके इसके लिए हमें आप सभी के सहयोग की आवश्यकता रहेगी। सम्पर्क सूत्र- +91-9170055755 आप हमारे सदस्य बने ताकि हमारी हर पोस्ट की जानकारी का नोटिफिकेशन आपको ...

मंडरिक (मंदरुवा),MANDRIK (MANDARUA)

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मंडरिक (मंडरुवा),MANDRIK (MANDARUA) मिश्रित तीर्थ क्षेत्र में होने वाले 84 कोशीय परिक्रमा का सातवां पड़ाव स्थल है यहीं पर मांडव ऋषि का आश्रम है , माण्डव ऋषि के नाम पर ही इस स्थान का नाम मांड़रूआ पड़ा। यहाँ पर फाल्गुन मास  की सप्तमी को परिक्रमा का पड़ाव पड़ता है ,यहाँ के निवासी साधु संतो के स्वागत सत्कार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है भंडारा करते हैं हर घर पर उत्सव का वातावरण होता है इस मेले में देश विदेश से लोग आते हैं यहाँ के बाग़ बगीचों में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु रात्रि विश्राम करते हैं रात भर भजन कीर्तन व प्रवचन होते हैं।  बाल्मीकि आश्रम ,बर्मी  बाल्मीकि आश्रम ,बर्मी  बाल्मीकि आश्रम ,बर्मी  पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  हनुमान मंदिर पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  माँ दुर्गा पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  भगवान शिव जी पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  पंचवटी आश्रम चन्द्रावलि  श्रद्धालु गण विश्राम करते हुए  श्रद्धालु गण विश्राम करते हुए  श्रद्धालु गण विश्राम करते हुए  माण्डव ऋषि आश्रम...